पहला प्यार भूल पाना असंभव…यही बयां करता है हृत्पिण्ड

कोलकता, (नि.स)l फ़िल्म स्वेटर फेम निर्देशक शिलादित्य मौलिक की नई फिल्म हृत्पिण्डो शुक्रवार को रिलीज हुई है. इस फ़िल्म में साहेब चटर्जी, अर्पिता चटर्जी और प्रान्तिक बनर्जी ने मुख्य भूमिका निभाई है. फ़िल्म में म्यूज़िक रनोजय भट्टाचार्या ने दिया है. पहला प्यार भूल पाना असंभव होता है..यही बयान करती है फ़िल्म. फ़िल्म 13 मई 2022 से सभी सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है. गत बृहस्पतिवार को यहां फिल्म का प्रीमियर हुआ. मौके पर फ़िल्म से जुड़े सारे कलाकार मौजूद थे.

फ़िल्म की कहानी: शोमोक (साहेब चटर्जी) और आरजा (अर्पिता चटर्जी) की शादी-शुदा ज़िंदगी ठीक ही चल रही थी. एक दिन अचानक आरजा का एक्सीडेंट हो जाता है. और उसकी याददाश्त चली जाती है. उस दौरान आरजा को उसके पुराने मंगेतर रिक (प्रान्तिक बनर्जी) की याद आ जाती है. वह रिक तक पहुंचने का प्रयास करती है. इससे पहले कि वह ऐसा कुछ करती रिक उस तक पहुंच जाता है. दोनों फिर से एक सम्बन्ध में बंध जाते हैं. इधर शोमोक भी आरजा को छोड़कर चले जाने का सिद्धांत ले लेता है. अब आगे क्या होता है, इसके लिए आपको पूरी फ़िल्म देखनी पड़ेगी.

कैसी लगी फ़िल्म: पहले तो यह बता दें, पहाड़ों की हसीन वादियों में फ़िल्म को शूट किया गया है, जो आपकी आंखों को सुकून पहुंचाएगी. फ़िल्म का हर एक गीत खासतौर पर मेखला दासगुप्ता की ‘मन केमोनेर जन्मदिन’ सुपर-डुपर हिट हो चुकी है. रनोजय भट्टाचार्या ने असाधारण म्यूज़िक दिया है. इसके बोल भी उसी ने लिखे हैं. अब जहां तक कलाकारों के अभिनय की बात आती है तो सबसे पहले जिनका नाम आता है वो हैं अर्पिता चटर्जी. पूरी फिल्म में ऐसा लग रहा था कि उन्होंने अपने किरदार को जिया है. उनके लुक से लेकर एक्सप्रेशन्स, उनकी डायलॉग डिलीवरी अत्यंत सराहनीय है. उनकी एक्टिंग को देखकर आपको श्रीदेवी अभिनीत फिल्म सदमा की याद आ सकती है, ऐसा बोलना कदापि गलत नहीं होगा. वहीं साहेब चटर्जी एक मंजे हुए कलाकार हैं, उन्होंने भी बेहतरीन काम किया है. प्रान्तिक ने भी अपने किरदार के साथ पूरी तरह से न्याय किया है. लेकिन अर्पिता के विपरीत हर कोई फीका लगा. फ़िल्म की जो कहानी है, इस तरह की कहानियां हम पहले भी देख चुके हैं. लेकिन बहुत दिनों के बाद वैसा ही एक अटेम्प्ट लिया गया है. इसके लिए निर्देशक शिलादित्य मौलिक को दाद देनी होगी. यह वाकई दिलचस्प है.

प्रीमियर के दौरान किसने क्या कहा-निर्देशक शिलादित्य के अनुसार इस फ़िल्म में हृदय और हृदय के पिण्ड से जुड़ी घटनाओं को दर्शाया गया है. उनके मुताबिक दोनों भिन्न वस्तुएं हैं. उन्होंने कहा, मेरे अनुसार हृदय से हम अपनी अनुभूतियों को जोड़ते हैं. वहीं हृत्पिण्ड, ऑक्सिजन और रक्त को लेकर काम करती है. यूं कह सकते हैं, अनुभूति विहीन यंत्र. इसी लिहाज़ से प्यार… हृदय और हृत्पिण्ड, दोनों चीज़ों से प्रस्फुटित हो सकती है. हृत्पिण्ड, जो कि मेकैनिकल साइड ऑफ लव है और हृदय एक इमोशनल चीज़ है. पूरी फिल्म में मैंने इसी विषय को समझाने की कोशिश की है. मौके पर अर्पिता चटर्जी ने कहा, इस फ़िल्म में मैं आरजा नामक एक कॉलेज प्रॉफेसर के किरदार में हूं. ऐसा किरदार मैंने आज तक नहीं किया है. यह काफी चैलेंजिंग था.

वहीं साहेब चटर्जी ने कहा, इस फ़िल्म से मेरी काफी उम्मीदें हैं.
दूसरी तरफ प्रान्तिक ने कहा, मैंने अर्पिता के विपरीत काम किया है. उनसे काफी कुछ सीखने का मौका मिला है. फ़िल्म के निर्माता कान सिंह सोढा ने कहा, मेरे ख्याल से प्यार की कोई परिभाषा नहीं हो सकती.

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