डाकघर एजेंटों का भविष्य सुनिश्चित नहीं : एनएसएसएएआइ ने की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग

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कोलकाता: डाकघर एजेंटों का भविष्य सुनिश्चित नहीं है, केंद्र सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए, यह कहना है राष्ट्रीट अल्प बचत अभिकर्ता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पृथ्वीश भट्टाचार्य का सोमवार को कोलकाता प्रेस क्लब में संघ द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में श्री भट्टाचार्य ने एजेंटों की समस्याओं को रखते हुए 22 विभिन्न मांगों को रखा, जिन पर केंद्र सरकार को तुरंत ध्यान देने की मांग की. उन्होंने कहा कि पूरे देश में पुरुष और महिला मिलाकर कुल साढ़े पांच लाख एजेंट हैं, लेकिन इन एजेंटों को परिचय पत्र तक नहीं दिये गये हैं. बिना परिचय पत्र के काम करने के कारण चुनाव की घोषणा के समय ग्राहकों व निवेशकों के रुपये जमा करने जाने के दौरान एजेंटों को पुलिस की चेकिंग में पहचान पत्र नहीं रहने से परेशानियों को झेलना पड़ता है. वित्त मंत्रालय द्वारा हर एजेंट को जल्द से जल्द एक पहचान पत्र दिया जाना चाहिए, एजेंटों का भविष्य नहीं है, पेंशन, ग्रेच्युटी आदि की सुविधा चालू होनी चाहिए. यहीं नहीं अगर एजेंट मर जाते हैं, तो उनके परिवार को उसकी एजेंसी सौंप देना चाहिए, उन्होंने कहा कि एजेंसी के नवीनीकरण के दौरान हर तीन साल पर मांगी जानेवाली पुलिस सत्यापन रिपोर्ट को तत्काल रोक दिया जाना चाहिए, क्योंकि सरकार और लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए नियुक्त एजेंट असामाजिक या अपराधी नहीं है. उन्होंने कहा कि देश के हर डाकघरों में एजेंटों के बैठने और काम करने के लिए एक निश्चित स्थान तय किया जाना चाहिए. मौके पर एनएसएसएएआई के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार मिश्रा ने कहा कि डाकघर में अधिक समय लिंक फेल रहते है, जिस कारण एजेंटों को नुकसान उठाना पड़ता है. पहले एजेंटों का कमिशन एक प्रतिशत था, जिसे आधा कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से सभी स्तरों पर मजदूरी में वृद्धि की गयी है, हम मांग करते है कि मानकीकृत एजेंसी प्रणाली (एसएएस) एजेंट के दो प्रतिशत और महिला प्रधान क्षेत्रीय बचत योजना एजेंट (एमपीकेबीवाई) का कमिश्नपांच प्रतिशत किया जाये. एनएसएसएआई के बंगाल सर्कल के महासचिव सिंचन चटर्जी ने कहा कि एजेंटों की तमाम समस्याओं को लेकर आगामी दिन दो दिवसीय पांचवा राष्ट्रीय सम्मेलन होगा, जो हावड़ा के शरत सदन में आयोजित होगा. इस दौरान देश के 23 राज्यों से प्रतिनिधि शामिल होंगे.

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