कचरे के ढेर से होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर करीब 1200 छात्राएं, शिक्षिका बोलीं—3 साल से शिकायत करते-करते घिस गई चप्पल
टीटागढ़। टीटागढ़ स्थित टीटागढ़ पौर माध्यमिक बालिका विद्यालय (एच.एस.) में करीब 1200 छात्राएं पढ़ाई करती हैं। रोजाना इन छात्राओं को स्कूल पहुंचने के लिए जिस रास्ते से गुजरना पड़ता है, वहां टीटागढ़ नगरपालिका द्वारा जमा किए गए कचरे के ढेर और खड़े वाहनों के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल बी.टी. रोड, टीटागढ़ में स्थित है।
स्कूल के बाहर जमा कचरे से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी के बीच से होकर छात्राओं को प्रतिदिन स्कूल परिसर में प्रवेश करना पड़ता है। ऐसे में स्कूल आने-जाने के दौरान उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। छात्राओं और शिक्षकों के लिए यह स्थिति लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई है।

विद्यालय की टीचर-इन-चार्ज सोमा भट्टाचार्य का कहना है कि इस समस्या को लेकर वह पिछले करीब तीन वर्षों से टीटागढ़ नगरपालिका के चक्कर लगा रही हैं। उन्होंने कहा, “तीन सालों से टीटागढ़ म्युनिसिपैलिटी जाकर-जाकर मेरी चप्पल घिस गई हैं, लेकिन कचरा आज तक साफ नहीं हुआ। ऐसे में मैं किसके पास जाऊं?”

सोमा भट्टाचार्य के अनुसार, स्कूल की छात्राएं भी उनसे आकर शिकायत करती हैं। छात्राएं कहती हैं, “मैडम, काफी बदबू आ रही है।” लेकिन लगातार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से स्कूल प्रबंधन भी परेशान है। उनका कहना है कि आखिर वह अपनी फरियाद लेकर किसके पास जाएं।

स्कूल जैसी संवेदनशील जगह के बाहर लंबे समय तक कचरा जमा रहना स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्राओं की आवाजाही वाले इस रास्ते पर साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।
अब सवाल यह है कि क्या स्कूल की बच्चियों को साफ-सुथरे रास्ते से स्कूल पहुंचने का अधिकार नहीं है? छात्राओं और शिक्षकों की नजर अब टीटागढ़ नगरपालिका पर है कि स्कूल के बाहर जमा कचरे की समस्या का समाधान आखिर कब होगा।
