प्यार हुआ था चोरी चोरी

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-बिज़नेस मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद राज को देश की प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल कम्पनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड में नौकरी मिल जाती है. इस वजह से वह सातवें आसमान पर था क्योंकि पहले से ही उसे गाड़ियों का काफी शौक था. अब आये दिन उसे मारुति की नई-नई गाड़िया बेचनी पड़ती थी. नए-नए लोगों से राज परिचित होने लगा. उसपर लोगों से मिलने और उन्हें गाड़ियां बेचने का एक जुनून सवार था. इधर वह सोसल साइट पर भी एक्टिव था. किसी एक माध्यम से एकदिन उसकी मुलाकात मोहिनी नामक एक लड़की से हो जाती है. राज मोहिनी को अपनी पहली डेट पर एक रेस्तरां में लेकर जाता है. मोहिनी को पहली नज़र में ही राज से प्यार हो जाता है. लेकिन राज को प्यार से ज़्यादा लोगों से मिलने और उन्हें अपना बनाने में काफी दिलचस्पी थी. वक़्त बीतता गया राज और मोहानी दोनो एक दूसरे के करीब आने लगें. दूसरी तरफ मारुति में राज के कार्यों को काफी सराहा जा रहा था. इसके चलते मोहिनी काफी खुश थी. राज एकदिन मोहिनी को अपने माता-पिता से मिलवाने के लिए अपने घर लेकर जाता है. राज के माता-पिता को मोहिनी पसन्द आती है, लेकिन वे इस रिश्ते से नाखुश थे. क्योंकि मोहिनी अपनी मां के साथ अपने नाना के यहां रहती है. बचपन में ही उसके पिता का देहान्त हो गया था. हालांकि अब उसके पिता की नौकरी उसकी मां को मिल जाती है. उसी से दोनों का गुजारा होता है.

मोहिनी को धीरे-धीरे इस बात का आभास होने लगता है कि राज के माता-पिता शायद उससे बढ़कर उसके फैमिली बैकग्राउंड पर ज़्यादा जोड़ दे रहे थे. एकदिन वह राज को पूरी बात बताती है. लेकिन राज इस बात को सीरियसली नहीं लेता है. इसी बीच मोहिनी अपनी स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर लेती है और उसे एक बढ़िया नौकरी मिल जाती है. अब मोहिनी के पास भी बोलने लायक एक जगह थी. लेकिन राज के माता-पिता अपनी जिद पर अड़े थे. मोहिनी को धीरे-धीरे उनकी बातें अखरने लगी. वह फिर भी राज को अपने से अलग नहीं करना चाहती थी. इधर मोहिनी की मां चाहती थी कि मोहिनी के हाथ जल्द से जल्द पीले हो जाए. क्योंकि वह अकेली है और वक़्त का कोई भरोसा नहीं, कब किस ओर करवट बदले. इसी बीच मोहिनी, राज को उसके साथ शादी के बंधन में बंधने के लिए प्रस्ताव देती है. राज पूरी तरह से अब भी तैयार नहीं था. लेकिन वह मोहिनी से बेइंतेहा प्यार करता था. उसे घुमाने से लेकर उसकी हर एक छुपी हुई ख्वाहिशें पूरी करता रहता था. लेकिन मोहिनी को जल्द से जल्द विवाह करना था. राज उलझन में फंसता चला जा रहा था. एक तरफ वह अपने मां-बाप को मनाने के लिए लगा हुआ था, तो दूसरी तरफ मोहिनी को समझाता रहता था कि वक़्त के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा. इधर मोहिनी को दिल की बीमारी है, जिससे उसकी मां भली भांति वाकिफ है. मोहिनी इस विषय को और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी. एक दिन वह बीमार पड़ जाती है. डॉक्टरों की टीम बताती है कि अगर मोहिनी पुरानी बातों को अपने दिल से नहीं निकाल पाती है तो मामला और बिगड़ सकता है. मोहिनी की मां उसे अपनी उम्र का तकाजा देते हुए समझाती है कि वह एकबार अपने पति को खोई है, दूसरी बार अपनी बेटी खोना नहीं चाहती है. मोहिनी इस बात को दिल पर ले लेती है. और एकदिन सब कुछ छोड़कर विदेश चली जाती है. इधर राज उसकी तलाश में जुट जाता है लेकिन उसे कोई भी खबर नहीं मिलती है. इस घटना के 3 साल बाद राज को एक दिन मोहिनी रास्ते में दिख जाती है. जब वह उसके करीब पहुंचता है तो उसे मोहिनी की मांग में सिंदूर दिखाई देता है. राज अवाक हो जाता है. आज भी राज को मोहिनी की जब भी याद आती है, वह यही सोचता है कि उसने मोहिनी को चोरी-चोरी अपने दिल मे बसा लिया है. आज भी राज अकेला है और तन्हाइयों से जूझ रहा है. शायद अब भी वह मोहिनी को भुला नहीं पाया है.

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